एक दिन, खेल-खेल में उस बल्लू को एक शरारत सूझी। वो भेड़ चराने जंगल में गया और वहां एक ऊंचे से पेड़ पर चढ़ के जोर-जोर से चिल्लाने लगा,
"भेड़िया आया! भेड़िया आया! जल्दी आओ, बचाओ! बचाओ!"
उसकी आवाज़ सुनकर गांव के लोग अपने सारे काम छोड़कर दौड़ते हुए उसकी ओर आए। लेकिन वहां पहुँचने पर देखा कि चरवाहा उन लोगो पर हँस रहा था। लोगों को समझ आ गया कि, उन्हें मूर्ख बनाया गया है। बल्लू ने झूठ बोला था। लोग गुस्से में उसे समझाकर लौट गए।
लेकिन बल्लू आदत से बाज़ नहीं आया। अगले दिन उसने फिर से वही शरारत दोहराई "भेड़िया आया! भेड़िया आया! बचाओ! बचाओ!"। इस बार भी लोग दौड़े-दौड़े आए, पर फिर उन्हें बल्लू का मजाक समझ में आ गया। लेकिन इस बार लोग बहुत गुस्से में थे और वो बल्लू को बिना कुछ कहे ही वापस चले गए। गांव के लोग उससे नाराज़ रहने लगे अब वो उसकी बातों पर भरोसा नहीं करते थे |
कुछ दिनों बाद सचमुच जंगल से एक भेड़िया गांव की ओर आया। बल्लू ने भेड़िये को देखा और घबरा कर चिल्लाने लगा, "भेड़िया आया! भेड़िया आया! बचाओ!" लेकिन इस बार किसी ने उसकी आवाज़ पर ध्यान नहीं दिया। सबको लगा कि बल्लू फिर से मजाक कर रहा है। बल्लू बार-बार चिल्लाता रहा, लेकिन उसकी मदद के लिए कोई नहीं आया। आखिरकार, भेड़िये ने उसकी कई भेड़ को को मार डाला और जंगल में वापस भाग गया।
जब तक गांव वालों को सच्चाई का पता चला तब तक देर हो चुकी थी | बल्लू को अब अपनी गलती का एहसास हुआ। उसे समझ में आ गया कि अगर बार-बार झूठ बोलो, तो लोग सच्चाई पर भी यकीन नहीं करते। उसी दिन से उसने अपनी शरारतें छोड़ दीं और सच बोलने का संकल्प लिया। तो दोस्तों, देखा आपने! झूठ बोलने का नतीजा क्या हुआ। इसलिए हमें हमेशा सच बोलना चाहिए |
सीख:- इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि झूठ बोलने से केवल हानि होती है और सच बोलने से ही विश्वास बना रहता है। इसलिए हमें हमेशा सच बोलना चाहिए, हालात चाहिए जो भी हो, जहां तक संभव हो सच बोलने की आदत डालिये ताकि लोग आप पर विश्वास कर सकें।
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