सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

Panchtanra ki Kahaniya लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बुद्धिमान बंजारा | Motivational Story | हिंदी कहानियाँ

एक बंजारा था। वह गधों पर मुल्तानी मिट्टी लादकर राजस्थान से दिल्ली की तरफ जा रहा था। रास्ते में गाँवों से गुजरते समय उसकी बहुत-सी मुल्तानी मिट्टी बिक गयी। गधों की पीठ पर लदे बोरे आधे तो खाली हो गये और आधे भरे रह गये। अब वे गधों की पीठ पर टिकें कैसे? क्योंकि भार एक तरफ ज्यादा हो गया और एक तरफ कम ! नौकरों ने पूछा कि क्या करें ? बंजारा बोला-'अरे! करना क्या है? बोरों के एक तरफ बालू रेत भर लो, संतुलन बन जाएगा। नौकरों ने वैसा ही किया। अब तो गधों की पीठ पर अच्छा संतुलन बन गया | उन्हें रास्ते में एक सज्जन मिले। उसने नौकरों से पूछा कि बोरों में एक तरफ रेत क्यों भरी है ? नौकरों ने कहा- 'सन्तुलन करने के लिये। वे सज्जन बोले- अरे! तुम यह क्या मूर्खता कर रहे हो। यदि रेत के स्थान पर मुल्तानी मिट्टी भर देते तो कम-से-कम आधे गधे तो बिना भार के चलते। नौकरों ने कहा, "कि आपकी बात तो ठीक है, पर हम वही करेंगे, जो हमारा मालिक कहेगा। आप जाकर हमारे मालिक से यह बात कहो। वह सज्जन बंजारे से मिला और उससे अपनी बात कही। बंजारे ने पूछा कि आप कौन हैं ? उसने कहा कि मैं व्यापारी हूँ। रुपये कमाने के लिये दिल्ल...

चार ठगों की कहानी | Motivational Story | पंचतंत्र की कहानियाँ

  एक समय की बात है, एक गाँव में चार ठग रहते थे । वे लोग बड़े चालाक और धूर्त थे, जो लोगों को ठगने के नए-नए तरीके खोजते रहते थे। एक दिन उन्हें खबर मिली कि एक भोला-भाला ब्राह्मण यज्ञ से मिली एक बकरी लेकर अपने घर जा रहा है। उन्होंने सोचा कि इस बकरी को हड़पने का यह एक अच्छा मौका है। चारों ठगों ने मिलकर योजना बनाई। वे रास्ते में चार अलग-अलग जगहों पर खड़े हो गए, ताकि ब्राह्मण को भ्रमित कर सकें। जैसे ही ब्राह्मण उस रास्ते से गुजरा, पहला ठग उसके पास आया और बोला, "अरे पंडित जी ! आज इस कुत्ते को कहाँ घुमा रहे हो?  ब्राह्मण ने कहा, "भाई यह कुत्ता नहीं, बकरी है। मैंने इसे यज्ञ में दान के रूप में पाया है।"  ठग ने हँसते हुए कहा, "अरे पंडित जी ! क्यों मज़ाक कर रहे हो, एक कुत्ते को बकरी बता रहे हो..।" ब्राह्मण  ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और आगे बढ़ गया। कुछ दूरी चलने के बाद, दूसरा ठग सामने आया और उसने पंडित जी से पूछा' 'पंडित जी कुत्ता तो अच्छी नसल का दिखता है, कहां से लाए हो? अब ब्राह्मण थोड़ा असमंजस में पड़ गया और उस व्यक्ति की ओर देखने लगा, लेकिन फिर भी उसने अ...

भेड़िया आया, भेड़िया आया | Bhediya Aya Bhediya Aya | पंचतंत्र की कहानियाँ

 एक बार की बात है, एक छोटे से गांव में बल्लू नाम का एक चरवाहा रहता था। उसे मजाक करना बहुत पसंद था, और गांव के लोग उसकी हरकतों से परेशान रहते थे। वह बात-बात पर झूठ बोलता था। एक दिन, खेल-खेल में उस बल्लू को एक शरारत सूझी। वो भेड़ चराने जंगल में गया और वहां एक ऊंचे से पेड़ पर चढ़ के जोर-जोर से चिल्लाने लगा,  " भेड़िया आया! भेड़िया आया ! जल्दी आओ, बचाओ! बचाओ!" उसकी आवाज़ सुनकर गांव के लोग अपने सारे काम छोड़कर दौड़ते हुए उसकी ओर आए। लेकिन वहां पहुँचने पर देखा कि चरवाहा उन लोगो पर हँस रहा था। लोगों को समझ आ गया कि, उन्हें मूर्ख बनाया गया है। बल्लू ने झूठ बोला था। लोग गुस्से में उसे समझाकर लौट गए। लेकिन बल्लू आदत से बाज़ नहीं आया। अगले दिन उसने फिर से वही शरारत दोहराई "भेड़िया आया! भेड़िया आया! बचाओ! बचाओ!"। इस बार भी लोग दौड़े-दौड़े आए, पर फिर उन्हें बल्लू का मजाक समझ में आ गया। लेकिन इस बार लोग बहुत गुस्से में थे और वो बल्लू को बिना कुछ कहे ही वापस चले गए। गांव के लोग उससे नाराज़ रहने लगे अब वो उसकी बातों पर भरोसा नहीं करते थे | कुछ दिनों बाद सचमुच जंगल से एक भेड़िया गां...